साहित्य का आधार जीवन है | इसी नीव पर साहित्य की दीवार कड़ी है |

निर्देश- निन्मलिखित को ध्यान से पढ़िए और इसके आधार पर प्रश्न-संख्या 1 से 2 तक उत्तर दीजिए |

गद्धांश- साहित्य का आधार जीवन है | इसी नीव पर साहित्य की दीवार कड़ी है | उस पर अटारियाँ-मीनार-गुम्बद बनते है |उन्हें देखने को भी जी नहीं चाहेगा | परमात्मा की सृष्टि है इसलिए सुबोध, सुगम तथा मर्यादाओं से परिमित है | जीवन, परमात्मा को अपनेकार्यो का जवाबदेह है या नहीं? हमें नहीं मालूम लेकिन साहित्य तो मनुष्य के सामने जवाबदेह है | इसके लिए कानून है, जिनसे वह इधर-उधर नहीं हो सकता | जीवन उद्देश्य ही आनंद है | मनुष्य जीवन पर्यन्त आनंद की खोज में लगा रहता है | किसी को वह रत्न द्रव्य में मिलता है; किसी को म्हारे-पुरे परिवार में; किसी को लंबे-चौड़े भवन में तथा किसी को एश्वर्य में किन्तु साहित्य का आनंद इस आनंद से ऊँचा है; उसका आधार सुन्दर और सत्य है | वास्तव में, सच्चा आनंद सुन्दर और सत्य से मिलता है | उसी आनंद को प्रकट करना, वहीं आनंद को प्रकट करना, वहीं आनंद उत्पन्न करना साहित्य का उद्देश्य है | ऐश्वर्य अथवा भोग के आनंद में ग्लानि छुपी होती है; पश्चाताप भी होता है | दूसरी और सुन्दर से जो आनंद प्राप्त है, वह अखंड है; अमर है |

  1. सबसे ऊँचा साहित्य आनंद वह होता है, जो-
    (a) भौतिक साधनों से प्राप्त होता है
    (b) सत्य से प्राप्त होता है
    (c) साहित्य से प्राप्त होता है
    (d) परमात्मा से प्राप्त होता है
  2. सच्चा आनंद किस्से मिलता है-
    (a) साहित्य से
    (b) परमात्मा से
    (c) सुन्दर और सत्य से
    (d) भोग और एश्वर्य से
Anurag Mishra Professor Asked on 1st March 2016 in Hindi.
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  • 1 Answer(s)
    1. (c) साहित्य से प्राप्त होता है
    2. (c) सुंदर और सत्य से
    Anurag Mishra Professor Answered on 2nd March 2016.
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